स्कूल में सेफ्टी

जयपुर। शहर के अधिकांशस्कूलों में न तो स्टूडेंट का बीमा कराया जाता है और न ही आग से सुरक्षा के पर्याप्त उपाय है। लेकिन पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में बच्चों का सामूहिक बीमा कराने और आग से सुरक्षा के उपायों को अनिवार्य करने के निर्देश के बाद सभी सचेत हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्कूल उसकी पालना के लिए प्रयास करने लगे हैं। शहर के कुछ स्कूल पहले से ही स्टूडेंट्ïस की सुरक्षा की दृष्टिï से अच्दी सेवाए दे रहे हैं, वे भी अब अधिक सजग हो गए हैं।

सवाल बचों की सुरक्षा का


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का अधिकांश लोगों ने स्वागत किया है। इनमें शहर के ज्यादातर स्कूल भी शामिल हैं। मानसरोवर स्थित आईआईएस स्कूल के डॉ। अशोक गुप्ता कहते हैं कि कोई भी स्कूल खोलने की अनुमति बिना सुरक्षा व्यवस्थाओं को परखे नहीं दी जाती, लेकिन सुप्रिम कोर्ट के निर्देश को ध्यान में रखकर हम स्कूल परिसर में किसी भी तरह के हानिकारक पदार्थों के प्रवेश पर भी ध्यान देंगे। दूसरी ओर, पेरेंट्ïस भी मानते हैं कि स्टूडेंट्स के लिए शिक्षा का जितना महत्व है उतनी ही महत्वपूर्ण उनकी सुरक्षा भी है। मुरलीपुरा निवासी अनल सुरोलिया कहते हैं कि यदि हम बच्चों को स्कूल में भेजते हैं तो इस दौरान उनकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी भी स्कूल प्रशासन की होती है। ऐसे में स्कूल प्रशासन को चाहिए कि वो अपने यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजामात रखें।


स्कूल प्रिंसिपल्स की जुबानी


एमर्र्जेंसी के लिए तैयार...


रामबाग स्थित सुबोध पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल बेला जोशी कहती हैं स्कूल में सभी स्थानों पर आवश्यकता अनुरूप फायर सेफ्टी के लिए गैस बर्नर लगाए गए हैं। जिनके इस्तेमाल के लिए स्कूल में टीचर्स को ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे दुर्घटना के समय आग्निशमन यंत्रों के उपयोग व बचाव के तरीके सिखाए जाते हैं।


सावधानी, सुरक्षा देती


हैमाहेश्वरी गल्र्स पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल आशा सहगल कहती हैं फायर सेफ्टी के लिए स्कूल में कहती हैं स्कूल लेब में बचों के साथ हमेशा दो टीचर रहते हैं, स्टूडेंट्ïस एप्रिन पहनकर ही काम करते हैं। फिर भी सुरक्षा की दृष्टिï से लैब में अमोनिया का डाल्युट घोल तैयार रखते हैं ताकि दुर्घटना के समय तुरंत इसका प्रयोग किया जा सके।


इंतजाम हैं, मुस्तेद


भीसीडलिंग स्कूल की प्रिंसिपल मोहिनी बक्सी कहती हैं स्टूडेंट्स को फायर सेफ्टी के बारे में जानकारी दी जाती है। लैब में अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं। सभागृह में भी यह यंत्र हैं। कपील ज्ञानपीठ स्कूल के प्रिंसिपल अशोक वैद कहते हैं कि कैमिकल लैब में बच्चों की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण होती है, जिसके लिए लैब में हर कॉर्नर में अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं। महावीर पब्लिक स्कूल की उर्मिल वर्मा कहती हैं लैब में कैमिकल बच्चों से दूर रखे जाते हैं। फायर सेफ्टी के लिए मेडिकल कीट रखते हैं। संजय पब्लि स्कूल की प्रिंसिपल कहती हैं कि स्कूल में समय-समय पर अग्निशमन यंत्रों को चेक किया जाता है।


पेरेंट्स चाहते हैं, बचे भी हों ट्रेंड


मानसरोवर निवासी उषा पचौरी कहती हैं स्कूल में बच्चों की सेफ्टी के लिए ध्यान देना बहुत जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट का डिसीजन बहुत ही सही है। वैशाली नगर निवासी मंजू शर्मा कहती हैं स्टूडेंट्स के लिए स्कूल में स्टडी के साथ आपात स्थितियों से निपटने की शिक्षा दि जानी चाहिए।


ये है सुप्रीम कोर्ट का आदेश


स्कूल में पढ़ रहे स्टूडेंट्स की सुरक्षा को महत्वपूर्ण मानते हुए और देशभर में स्कूलों द्वारा इसमें बरती जा रही कोताही पर कड़ा रूख इख्तेयार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थाओं को सख्त हिदायत दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि स्कूलों में ऐसे सभी ज्वलनशील और खतरनाक पदार्थो पर प्रतिबंध लगाया जाए जो स्टूडेंट्स के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। स्कूल प्रशासन को ग्रुप इंश्योरेंस करने के लिए भी निर्देश दिए हैं।


सुरक्षा उपाय जरूरी है


स्कूल में फायर सेफ्टी के पूरे इंतजाम होना चाहिए। उतना ही जरूरी है कि स्कूल ईमारत खुली-खुली व चौड़े रास्ते हो। अग्निशमन यंत्र भी तीन साल में बदलते रहना चाहिए साथ ही समय-समय पर चैक जरूरी होने चाहिए।-पुरुषोतम शर्मा, फायर सेफ्टि एक्युपमेंट सर्विस प्रोवाइडर।


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